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पत्रकारिता को सत्य का संवाहक होना चाहिए: डॉ प्रदीप कुमार

मोतीलाल नेहरू कॉलेज में "गांधी युगीन पत्रकारिता से डिजिटल युग की पत्रकारिता" विषय पर संगोष्ठी संपन्न

 
नई दिल्ली: मोतीलाल नेहरू महाविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय की बीए प्रोग्राम सोसाइटी रचनायन द्वारा "गांधी युगीन पत्रकारिता से डिजिटल युग की पत्रकारिता" विषय पर मंगलवार को कॉलेज प्रांगण में संपन्न हुआ। इस आयोजन का उद्देश्य पत्रकारिता के माध्यम से न्याय और मानवीय गरिमा जैसे विषयों को उजागर करना रहा। गांधीजी ने अपनी पत्रकारिता में कभी भी सनसनीखेज खबरों या कटुता को स्थान नहीं दिया। वे तथ्यों की शुद्धता पर जोर देते थे। गांधीजी का मानना था कि विज्ञापन अखबारों की स्वतंत्रता को बाधित करते हैं। इसलिए उन्होंने 'इंडियन ओपिनियन' और 'यंग इंडिया' जैसे पत्रों में व्यावसायिक विज्ञापनों को प्रकाशित करना बंद कर दिया था। आम जनता तक पहुँचने के लिए उन्होंने बहुत ही सरल, सहज और स्पष्ट भाषा का प्रयोग किया, ताकि ग्रामीण और कम पढ़े-लिखे लोग भी उनके विचारों को समझ सकें।
 
       इस संगोष्ठी में वक्ता के तौर पर हेमंत कुमार सिंह ने गांधी युग की पत्रकारिता के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की और अखबार को सत्य अहिंसा का संवाहक बनाया। दूसरे वक्ता डा.प्रदीप कुमार अध्यक्ष , हिन्दी विभाग जगजीवन महाविद्यालय ने कहा पत्रकारिता को सत्य का संवाहक होना चाहिए आज डिजिटल युग में सत्य कहीं लूप होल मे फंसता जा रहा है आज गांधी जी के आदर्शो पर चल कर ही सच की सेवा और जनसेवा में लगाया जा सकता है।मुख्य वक्ता प्रो.अनिल कुमार उपाध्याय पूर्व अध्यक्ष,जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग,महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ ने अपने वक्तव्य मे विचार व्यक्त करते हुए कहा कि गांधी अखबार को समाज का ध्वजवाहक मानते थे और पत्रकारिता को मानव सेवा का औजार। डिजिटल युग की पत्रकारिता ने आज सबको पत्रकार बना दिया लेकिन पत्रकारिता का मूल खो गया है आज जरूरी है कि पत्रकारिता को पत्रकरिता के मानक पर किया जाय । मंच संचालन और धन्यवाद ज्ञापन अर्पित शुक्ला ने लिया। इस दौरान हिन्दी विभाग के शिक्षक सुगम संदीप, प्रो संदीप, प्रो. अशोक कुमार, डा.अनिरूद्ध और अंग्रेजी विभाग के सौरभ दुबे मौजूद रहें।

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