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हमें भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में निरंतर प्रयासरत रहना चाहिए: प्रो प्रवीण गर्ग

स्वामी श्रद्धानंद महाविद्यालय में वीर शिवाजी महाराज एवं स्वामी श्रद्धानंद जयंती पर विशेष व्याख्यान आयोजित

 
नई दिल्ली। स्वामी श्रद्धानंद मेमोरियल कमेटी एवं मेधाविनी सिंधु सृजन, दिल्ली प्रांत के संयुक्त तत्वावधान में स्वामी श्रद्धानंद महाविद्यालय में वीर छत्रपति शिवाजी महाराज एवं स्वामी श्रद्धानंद जयंती के उपलक्ष्य में स्वामी श्रद्धानंद एवं राष्ट्रनिर्माण विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं विश्वविद्यालय कुलगीत के साथ हुआ। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर प्रवीण गर्ग ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वीर शिवाजी और स्वामी श्रद्धानंद के व्यक्तित्व को आत्मसात करते हुए हमें भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में निरंतर प्रयासरत रहना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि इन महापुरुषों के योगदान को समझकर उनसे प्रेरणा लें तथा भारत, भारतीयता एवं भारतीय चिंतन को आत्मसात करने का सतत प्रयास करें।
 
मुख्य वक्ता आशुतोष ने दोनों महापुरुषों के योगदान को रेखांकित करते हुए हिंदुत्व की अवधारणा पर गंभीर चिंतन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भारतीय चिंतन की ऐतिहासिक विरासत को समकालीन चुनौतियों से जोड़ना आज की आवश्यकता है। स्वामी श्रद्धानंद ने अपना संपूर्ण जीवन सनातन धर्म और राष्ट्रप्रेम के लिए समर्पित कर दिया। उनका व्यक्तित्व मानव जीवन की सीमाओं से परे प्रेरणास्रोत है। उन्होंने बताया कि आर्य समाज की शिक्षाओं के माध्यम से समाज में व्याप्त समस्याओं का समाधान कर राष्ट्रहित में आगे बढ़ा जा सकता है। विशिष्ट वक्ता विनय आर्य ने स्वामी श्रद्धानंद के जीवन एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को दो महत्वपूर्ण पुस्तकों—‘कल्याण मार्ग का पथिक’ एवं ‘मेरे पिता’—का अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने धर्म, राष्ट्र और गौरवपूर्ण जीवन के मूल्यों के साथ मानवता, करुणा और उदारता जैसे आदर्शों पर भी बल दिया।
 
इस अवसर पर स्वामी श्रद्धानंद पर केंद्रित निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की संयोजक डॉ. प्रतिभा राणा ने स्वामी श्रद्धानंद एवं शिवाजी के व्यक्तित्व और कृतित्व से प्रेरणा लेने का संदेश दिया। आई.क्यू.ए.सी. कन्वीनर एवं समिति सदस्य प्रो. उशविन्दर कौर ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों की निरंतरता का आश्वासन दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आँचल जैन ने किया। इस अवसर पर स्मृति व्याख्यान समिति के सदस्य प्रो. किरण डबास, डॉ. दीपिका, डॉ. नेहा आहूजा, डॉ. मनीष कुमार, डॉ. ईषा गुनवाल, डॉ. एकता सिंह, डॉ. छगनलाल एवं डॉ. विरमा कुमारी की सक्रिय उपस्थिति रही।

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